शब्दावली
पाठों में इस्तेमाल हुए 147 शब्द, और हर शब्द का मतलब एक-दो वाक्यों में। संक्षिप्त नामों का पूरा नाम भी दिया गया है।
A
- AMC(एसेट मैनेजमेंट कंपनी)
- वह कंपनी जो फंड मैनेजरों को नौकरी पर रखती है और म्यूचुअल फंड का निवेश चलाती है। यह पैसा संभालती है, लेकिन कानूनी तौर पर उसे अपने पास नहीं रखती।
- AMFI(एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया)
- म्यूचुअल फंड उद्योग का संगठन। यह मार्केट कैप के आधार पर कंपनियों के वर्गीकरण की वह सूची जारी करता है, जिससे लार्ज, मिड और स्मॉल कैप तय होते हैं।
- AMO(आफ्टर मार्केट ऑर्डर)
- जब बाजार बंद हो, तब लगाया गया ऑर्डर। यह रातभर आपके ब्रोकर के पास रहता है और ट्रेडिंग शुरू होने पर एक्सचेंज को भेजा जाता है।
- एंकर निवेशकAnchor investor
- ऐसा बड़ा संस्थागत निवेशक, जिसे इश्यू खुलने से एक दिन पहले IPO के शेयर अलॉट होते हैं। ये शेयर तय कीमत पर मिलते हैं और इन पर लॉक-इन अवधि लागू होती है।
- ASBA(एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट)
- वह व्यवस्था जिसमें IPO के आवेदन की रकम आपके अपने बैंक अकाउंट में ब्लॉक होती है और शेयर अलॉट होने पर ही डेबिट होती है।
- आस्कAsk
- वह सबसे कम कीमत, जिस पर कोई इस समय शेयर बेचने को तैयार है। इसे ऑफर भी कहते हैं।
- ASM(एडिशनल सर्विलांस मेजर)
- एक्सचेंज का फ्रेमवर्क, जो कीमत या वॉल्यूम में असामान्य हलचल दिखाने वाले शेयरों पर ज्यादा मार्जिन जैसी अतिरिक्त पाबंदियाँ लगाता है।
- AUM(एसेट्स अंडर मैनेजमेंट)
- किसी फंड या AMC द्वारा संभाले जा रहे पैसे की कुल वैल्यू।
B
- बेसिस ऑफ अलॉटमेंटBasis of allotment
- इश्यू बंद होने के बाद जारी किया गया डॉक्यूमेंट, जो बताता है कि IPO के शेयर अलग-अलग कैटेगरी और आवेदकों के बीच कैसे बाँटे गए।
- बेंचमार्कBenchmark
- वह इंडेक्स जिससे किसी फंड के प्रदर्शन की तुलना की जाती है। 2018 से यह तुलना टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) से करनी जरूरी है।
- BER(बेस एक्सपेंस रेशियो)
- 1 अप्रैल 2026 से लागू फ्रेमवर्क के तहत, फंड की लागत का वह हिस्सा जो AMC के नियंत्रण में होता है। इसमें वैधानिक चार्ज और ब्रोकरेज शामिल नहीं होते।
- बिडBid
- वह सबसे ऊँची कीमत, जिस पर कोई इस समय शेयर खरीदने को तैयार है।
- बिड-आस्क स्प्रेडBid-ask spread
- सबसे ऊँची बिड और सबसे कम आस्क के बीच का अंतर। बड़ा स्प्रेड कम लिक्विडिटी और ट्रेड करने की ज्यादा लागत का संकेत देता है।
- बोनस इश्यूBonus issue
- मौजूदा शेयरधारकों को कंपनी के रिजर्व से जारी किए गए मुफ्त अतिरिक्त शेयर। शेयरों की संख्या बढ़ती है, कीमत उसी अनुपात में घटती है, और कुल वैल्यू नहीं बदलती।
- बुक बिल्डिंगBook building
- कीमत तय करने का एक तरीका, जिसमें निवेशक घोषित प्राइस बैंड के भीतर बोली लगाते हैं। इन बोलियों से बनी बुक के आधार पर अंतिम इश्यू प्राइस तय होता है।
- बुक क्लोजरBook closure
- वह अवधि जिसमें कंपनी शेयरधारकों का रजिस्टर बंद रखती है, ताकि किसी कॉर्पोरेट एक्शन के लिए रिकॉर्ड अपडेट किए जा सकें।
- BSDA(बेसिक सर्विसेज डीमैट अकाउंट)
- छोटे निवेशकों के लिए ऐसा डीमैट अकाउंट, जिस पर सालाना मेंटेनेंस चार्ज या तो लगता ही नहीं या कम लगता है। शर्त यह है कि होल्डिंग की वैल्यू तय सीमा के भीतर रहे।
- BSE(बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज)
- 1875 में स्थापित भारत का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज। सेंसेक्स इंडेक्स इसी का है।
- BTST(बाय टुडे सेल टुमॉरो)
- शेयर आपके डीमैट अकाउंट में क्रेडिट होने से पहले ही उन्हें बेच देना। अगर डिलीवरी नहीं हो पाती, तो इसमें ऑक्शन सेटलमेंट का जोखिम रहता है।
- बायबैकBuyback
- कंपनी का शेयरधारकों से अपने ही शेयर खरीदना और उन्हें रद्द कर देना, जिससे कंपनी के कुल शेयरों की संख्या घट जाती है।
C
- CAGR(कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट)
- एक साल से लंबी अवधि में मिले रिटर्न की सालाना दर।
- CAS(क्लोजिंग ऑक्शन सेशन)
- कारोबारी दिन के अंत में होने वाली नीलामी, जिससे आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय होता है। जिन शेयरों पर यह लागू है, उनमें इसने औसत निकालने के पुराने तरीके की जगह ली है।
- CDSL(सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड)
- भारत की दो डिपॉजिटरी में से एक, जो निवेशकों के डीमैट अकाउंट में शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखती है।
- सर्किट लिमिटCircuit limit
- वह अधिकतम सीमा, जहाँ तक किसी शेयर की कीमत एक दिन में ऊपर या नीचे जा सकती है। यह सीमा पिछले क्लोजिंग प्राइस से मापी जाती है। इसे प्राइस बैंड भी कहते हैं।
- क्लियरिंग कॉर्पोरेशनClearing corporation
- वह संस्था जो खरीदार और विक्रेता के बीच खड़ी होती है और सेटलमेंट की गारंटी देती है। इससे यह जोखिम खत्म हो जाता है कि आपके सौदे का सामने वाला पक्ष डिफॉल्ट कर दे।
- CNC(कैश एंड कैरी)
- डिलीवरी वाला प्रोडक्ट टाइप। इसमें आप पूरी रकम चुकाते हैं और शेयर आपके डीमैट अकाउंट में क्रेडिट होते हैं।
- कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंटConsolidated Account Statement
- समय-समय पर मिलने वाला स्टेटमेंट, जिसमें सभी AMC की हर म्यूचुअल फंड होल्डिंग पैन के आधार पर एक साथ दिखती है।
- कॉन्ट्रैक्ट नोटContract note
- किसी दिन के आपके सौदों का कानूनी रिकॉर्ड, जिसे आपका ब्रोकर ईमेल करता है। इसमें हर सौदे की कीमत, समय और सभी चार्ज का पूरा ब्योरा होता है।
- कॉर्पोरेट एक्शनCorporate action
- कंपनी का कोई भी ऐसा कदम, जिसका उसके शेयरों पर सीधा असर पड़ता है, जैसे डिविडेंड, बोनस, स्प्लिट, राइट्स इश्यू, बायबैक या विलय।
- कस्टोडियनCustodian
- वह संस्था जो किसी म्यूचुअल फंड स्कीम की सिक्योरिटीज अपने पास रखती है। यह उन्हें संभालने वाली AMC से अलग होती है।
- कट-ऑफ प्राइसCut-off price
- बुक बिल्डिंग वाले IPO में तय हुआ अंतिम इश्यू प्राइस। साथ ही, रिटेल निवेशकों के लिए कट-ऑफ का वह विकल्प, जिसमें वे अंतिम कीमत स्वीकार करते हैं, चाहे वह जो भी तय हो।
D
- डीलिस्टिंगDelisting
- किसी कंपनी के शेयरों को एक्सचेंज से हटाया जाना, जिसके बाद उनकी सार्वजनिक रूप से खरीद-बिक्री नहीं होती।
- डीमैट अकाउंटDemat account
- NSDL या CDSL के पास खुला अकाउंट, जिसमें आपके शेयर आपके अपने नाम पर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रहते हैं।
- डीमर्जरDemerger
- कंपनी का अपने किसी कारोबार को अलग करके एक नई, अलग से लिस्टेड कंपनी बनाना, जिसके शेयर मौजूदा शेयरधारकों को बाँटे जाते हैं।
- डिपॉजिटरीDepository
- सिक्योरिटीज को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने वाली संस्था। भारत में दो डिपॉजिटरी हैं: NSDL और CDSL।
- डायरेक्ट प्लानDirect plan
- डिस्ट्रीब्यूटर के बिना खरीदा गया म्यूचुअल फंड प्लान। इसलिए इसमें कोई कमीशन नहीं दिया जाता और इसका एक्सपेंस रेशियो उसी स्कीम के रेगुलर प्लान से कम होता है।
- डिविडेंड (लाभांश)Dividend
- कंपनी के मुनाफे में से शेयरधारकों को दी जाने वाली नकद रकम। इसकी घोषणा फेस वैल्यू के प्रतिशत के रूप में होती है, शेयर की कीमत के प्रतिशत के रूप में नहीं।
- डिविडेंड यील्डDividend yield
- प्रति शेयर सालाना डिविडेंड को शेयर की मौजूदा कीमत से भाग देकर निकाला गया आँकड़ा, जिसे प्रतिशत में बताया जाता है।
- DP(डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट)
- वह एजेंट, आमतौर पर आपका ब्रोकर, जिसके जरिए डिपॉजिटरी के पास आपका डीमैट अकाउंट खोला और चलाया जाता है।
- DP चार्जDP charge
- बेचे गए शेयर जब आपके डीमैट अकाउंट से निकलते हैं, तब लगने वाली तय फीस। यह प्रति कंपनी, प्रति दिन लगती है, चाहे कितनी भी वैल्यू के शेयर बेचे गए हों।
- ड्रॉडाउनDrawdown
- किसी शिखर से उसके बाद आए सबसे निचले स्तर तक की गिरावट। अधिकतम ड्रॉडाउन वह सबसे बड़ी गिरावट दिखाता है, जो किसी निवेशक को झेलनी पड़ती।
- DRHP(ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस)
- सेबी के पास दाखिल किया जाने वाला IPO का पहला ऑफर डॉक्यूमेंट। इसमें कारोबार, वित्तीय आँकड़ों और जोखिमों का ब्योरा होता है, लेकिन कीमत या तारीखें नहीं होतीं।
E
- ELSS(इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम)
- तीन साल के लॉक-इन वाला इक्विटी म्यूचुअल फंड, जो पुरानी टैक्स व्यवस्था में निर्धारित बचत पर मिलने वाली कटौती के लिए योग्य है (आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 123, पहले धारा 80C)।
- इक्विलिब्रियम प्राइस (संतुलन कीमत)Equilibrium price
- नीलामी में वह एक कीमत, जिस पर शेयरों की सबसे ज्यादा मात्रा मैच हो सकती है।
- ETF(एक्सचेंज ट्रेडेड फंड)
- ऐसा फंड जो किसी इंडेक्स को ट्रैक करता है और शेयर की तरह एक्सचेंज पर ट्रेड होता है। इसके लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है।
- एक्स-डेटEx-date
- वह पहला दिन, जब शेयर किसी कॉर्पोरेट एक्शन के हक के बिना ट्रेड होता है। फायदा पाने के लिए आपको इस तारीख से पहले खरीदना होगा।
- एग्जिट लोडExit load
- तय अवधि के भीतर यूनिट रिडीम करने पर रिडेम्पशन की रकम में से काटा जाने वाला चार्ज। यह चार्ज स्कीम के पास ही रहता है।
F
- फेस वैल्यू (अंकित मूल्य)Face value
- किसी शेयर की नाममात्र की अकाउंटिंग वैल्यू, जो आमतौर पर ₹1, ₹2, ₹5 या ₹10 होती है। इसका बाजार भाव से कोई संबंध नहीं होता।
- फैक्टशीटFactsheet
- हर स्कीम का हर महीने जारी होने वाला एक या दो पेज का डॉक्यूमेंट, जिसमें पोर्टफोलियो, लागत, रिटर्न, जोखिम के पैमाने और फंड मैनेजर की जानकारी होती है।
- FoF(फंड ऑफ फंड्स)
- ऐसा म्यूचुअल फंड जो सीधे सिक्योरिटीज में निवेश करने के बजाय दूसरे म्यूचुअल फंडों में निवेश करता है।
- फोलियोFolio
- किसी म्यूचुअल फंड हाउस में आपका अकाउंट नंबर, जिसके तहत आपकी यूनिट रखी जाती हैं। सामान्य स्कीमों के लिए डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं होती।
- FPO(फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर)
- पहले से लिस्टेड कंपनी द्वारा लाया गया शेयरों का एक और पब्लिक इश्यू।
- फ्री फ्लोटFree float
- किसी कंपनी के शेयरों का वह हिस्सा, जो वास्तव में सार्वजनिक खरीद-बिक्री के लिए उपलब्ध है। इसमें प्रमोटर हिस्सेदारी और दूसरी लॉक-इन वाली होल्डिंग शामिल नहीं होतीं।
- फ्रेश इश्यूFresh issue
- IPO का वह हिस्सा, जिसमें नए बनाए गए शेयर जारी होते हैं और पैसा कंपनी को मिलता है।
G
- GMP(ग्रे मार्केट प्रीमियम)
- IPO किस कीमत पर लिस्ट हो सकता है, इसका गैर-आधिकारिक और बिना नियमन वाला अंदाजा। यह एक अनौपचारिक बाजार से आता है, जहाँ वॉल्यूम कम होता है और जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है।
- ग्रोथ ऑप्शनGrowth option
- स्कीम का वह ऑप्शन, जिसमें मुनाफा बाँटा नहीं जाता, बल्कि निवेश में ही बना रहता है और बढ़ती NAV में दिखता है।
- GSM(ग्रेडेड सर्विलांस मेजर)
- एक्सचेंज का फ्रेमवर्क, जो कमजोर फंडामेंटल वाले या कीमत में असामान्य हलचल दिखाने वाले शेयरों पर चरणबद्ध पाबंदियाँ लगाता है।
- GTT(गुड टिल ट्रिगर्ड)
- आपके ब्रोकर के पास रहने वाला स्थायी निर्देश, जो लगभग एक साल तक मान्य रह सकता है। यह आपकी ट्रिगर की शर्त पूरी होने पर ही असली ऑर्डर बनाता है।
I
- IDCW(इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विड्रॉल)
- भुगतान वाला ऑप्शन, जिसे पहले डिविडेंड कहा जाता था। जितनी रकम बाँटी जाती है, NAV ठीक उतनी ही घट जाती है, और इस भुगतान पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है।
- IEPF(निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष)
- वह कोष जिसमें बिना दावे वाले डिविडेंड और शेयर एक तय अवधि के बाद ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। वहाँ से दावा करके इन्हें वापस पाया जा सकता है।
- इंडेक्स (सूचकांक)Index
- एक ही संख्या, जो चुने हुए शेयरों के समूह की कीमतों की चाल का सार बताती है, जैसे निफ्टी 50 या सेंसेक्स।
- इंडेक्स फंडIndex fund
- पैसिव म्यूचुअल फंड, जो किसी इंडेक्स में शामिल शेयरों को उसी अनुपात में रखता है, जिस अनुपात में वे इंडेक्स में हैं। इसे NAV पर खरीदा और रिडीम किया जाता है।
- इंडिया VIXIndia VIX
- अगले 30 दिन में बाजार के अनुमानित उतार-चढ़ाव का इंडेक्स, जो निफ्टी ऑप्शंस की कीमतों से निकाला जाता है। यह अनुमानित हलचल बताता है, दिशा नहीं।
- इंट्राडेIntraday
- ऐसी पोजीशन, जो एक ही कारोबारी दिन के भीतर खोली और बंद की जाती है।
- IOC(इमीडिएट ऑर कैंसल)
- ऑर्डर की ऐसी वैलिडिटी, जिसमें ऑर्डर का जो हिस्सा तुरंत एग्जीक्यूट नहीं हो पाता, वह उसी समय कैंसल हो जाता है।
- IPO(इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग)
- किसी कंपनी का आम लोगों को पहली बार शेयर बेचना, जिसके बाद वह स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो जाती है।
- ISIN
- हर सिक्योरिटी को दिया जाने वाला एक विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय पहचान नंबर।
K
- KIM(की इंफॉर्मेशन मेमोरेंडम)
- किसी म्यूचुअल फंड स्कीम के इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट का संक्षिप्त रूप।
- KYC(नो योर कस्टमर)
- निवेश से पहले जरूरी पहचान की पुष्टि, जो सिर्फ एक बार करानी होती है। पूरी होने के बाद यह पूरे उद्योग में मान्य रहती है।
L
- लिमिट ऑर्डरLimit order
- ऐसा ऑर्डर, जो सिर्फ आपकी बताई कीमत या उससे बेहतर कीमत पर एग्जीक्यूट होता है। इससे आपकी कीमत सुरक्षित रहती है, लेकिन हो सकता है कि ऑर्डर एग्जीक्यूट ही न हो।
- लिक्विडिटी (तरलता)Liquidity
- किसी शेयर को ठीक-ठाक मात्रा में, उसकी कीमत पर खास असर डाले बिना, कितनी आसानी से खरीदा या बेचा जा सकता है।
- लिस्टिंग प्राइसListing price
- किसी नए शेयर में ट्रेडिंग शुरू होने के दिन, स्पेशल प्री-ओपन सेशन की नीलामी में तय हुई कीमत।
- लॉक-इनLock-in
- वह अवधि जिसमें कुछ शेयर, जैसे एंकर निवेशकों या प्रमोटरों के शेयर, बेचे नहीं जा सकते।
- LODR(लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स)
- सेबी के नियम, जो तय करते हैं कि लिस्टेड कंपनी को किन बातों का खुलासा करना होता है, और कब।
- लॉट साइजLot size
- शेयरों की वह तय संख्या, जो IPO में आवेदन की एक इकाई होती है, या कुछ सेगमेंट में ट्रेडिंग की एक इकाई।
- LTCG(लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन)
- जरूरी होल्डिंग पीरियड से ज्यादा समय तक रखे गए एसेट पर हुआ मुनाफा। इस पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन से अलग दर से टैक्स लगता है।
M
- मैकाले ड्यूरेशनMacaulay duration
- किसी डेट पोर्टफोलियो के कैश फ्लो मिलने में लगने वाला औसत समय, सालों में। ड्यूरेशन जितनी लंबी होगी, दरें बदलने पर NAV में उतना ही बड़ा बदलाव होगा; सटीक रूप से यह असर इससे जुड़ी मॉडिफाइड ड्यूरेशन से मापा जाता है।
- मार्केट कैपिटलाइजेशनMarket capitalisation
- शेयर की कीमत गुणा कुल शेयरों की संख्या — यानी बाजार की नजर में पूरी कंपनी का वैल्यूएशन।
- मार्केट डेप्थMarket depth
- पेंडिंग खरीद और बिक्री ऑर्डरों की वह टेबल, जो उन्हें कीमत के एक-एक लेवल के हिसाब से दिखाती है। इससे पता चलता है कि मौजूदा कीमत के आसपास कितनी मात्रा के ऑर्डर मौजूद हैं।
- मार्केट ऑर्डरMarket order
- उपलब्ध सबसे अच्छी कीमत पर तुरंत एग्जीक्यूट होने वाला ऑर्डर। एग्जीक्यूशन लगभग पक्का होता है, लेकिन कीमत नहीं।
- विलय (मर्जर)Merger
- दो या ज्यादा कंपनियों का आपस में मिलकर एक हो जाना। इसमें जिस कंपनी को दूसरी कंपनी में मिलाया जाता है, उसके शेयरधारकों को बची रहने वाली कंपनी के शेयर एक तय स्वैप रेशियो में मिलते हैं।
- MIS(मार्जिन इंट्राडे स्क्वायर-ऑफ)
- लीवरेज वाला इंट्राडे प्रोडक्ट टाइप। पोजीशन उसी दिन बंद करनी होती है, वरना ब्रोकर उसे अपने-आप स्क्वायर-ऑफ कर देता है।
N
- NACH मैंडेटNACH mandate
- बैंक को दी गई वह अनुमति, जिससे SIP का पैसा अपने-आप डेबिट होता है। पहली किस्त से पहले इसका रजिस्टर होना और इसे मंजूरी मिलना जरूरी है।
- NCLT(नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल)
- वह ट्रिब्यूनल जो विलय और डीमर्जर जैसी स्कीम ऑफ अरेंजमेंट को मंजूरी देता है।
- NFO(न्यू फंड ऑफर)
- किसी नई म्यूचुअल फंड स्कीम में शुरुआती सब्सक्रिप्शन की अवधि, जिसमें आमतौर पर ₹10 प्रति यूनिट पर निवेश होता है। ऐसी स्कीम का कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होता।
- निफ्टी 50Nifty 50
- NSE का बेंचमार्क इंडेक्स, जिसमें 50 बड़ी और ज्यादा लिक्विडिटी वाली भारतीय कंपनियाँ हैं। इसमें हर कंपनी का वेटेज फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से तय होता है।
- NII(गैर-संस्थागत निवेशक)
- ₹2 लाख से ज्यादा के आवेदनों के लिए IPO की कैटेगरी, जिसे HNI कैटेगरी भी कहते हैं।
- नॉमिनीNominee
- वह व्यक्ति, जिसे आप चुनते हैं ताकि आपकी मृत्यु होने पर आपकी सिक्योरिटीज उसे मिलें। नॉमिनी जोड़ने से आपके परिवार के लिए सिक्योरिटीज का ट्रांसमिशन, यानी उन्हें अपने नाम करवाना, बहुत आसान हो जाता है।
- NRML(नॉर्मल)
- ऐसा प्रोडक्ट टाइप, जिसमें मुख्य रूप से डेरिवेटिव की पोजीशन को एक्सचेंज का तय किया पूरा मार्जिन देकर रातभर रखा जा सकता है।
- NSDL(नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड)
- भारत की दो डिपॉजिटरी में से एक, जो निवेशकों के डीमैट अकाउंट में शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखती है।
- NSE(नेशनल स्टॉक एक्सचेंज)
- ज्यादातर सेगमेंट में वॉल्यूम के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज। निफ्टी इंडेक्स इसी के हैं।
O
- OCO(वन कैंसल्स द अदर)
- दो निर्देशों की जोड़ी, आमतौर पर एक टारगेट और एक स्टॉप-लॉस, जिसमें एक के ट्रिगर होते ही दूसरा कैंसल हो जाता है।
- OFS(ऑफर फॉर सेल)
- IPO का वह हिस्सा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं। बिक्री का पैसा उन्हें मिलता है, कंपनी को नहीं।
- ओपन-एंडेड फंडOpen-ended fund
- ऐसी स्कीम जिसे आप किसी भी कारोबारी दिन उस दिन की NAV पर खरीद या रिडीम कर सकते हैं। भारत के ज्यादातर म्यूचुअल फंड ओपन-एंडेड हैं।
- ऑर्डर बुकOrder book
- किसी शेयर के सभी पेंडिंग खरीद और बिक्री ऑर्डरों की लाइव सूची। ये ऑर्डर पहले कीमत की प्राथमिकता और फिर समय की प्राथमिकता के हिसाब से मैच होते हैं।
- ओवरसब्सक्रिप्शनOversubscription
- जब किसी IPO में ऑफर किए गए शेयरों से ज्यादा शेयरों के लिए आवेदन आ जाते हैं। इससे माँग का पता चलता है, वैल्यू का नहीं।
P
- पैनPAN(परमानेंट अकाउंट नंबर)
- टैक्स से जुड़ा पहचान नंबर, जो भारत में सिक्योरिटीज बाजार के हर अकाउंट के लिए अनिवार्य है।
- गिरवी (प्लेज)Pledge
- मार्जिन पाने के लिए अपने शेयरों को जमानत के तौर पर देना, जिनकी वैल्यू पर हेयरकट लगता है। शेयर आपके ही रहते हैं।
- पोस्ट-क्लोजिंग सेशनPost-closing session
- बाजार बंद होने के बाद की छोटी विंडो, जिसमें दिन के क्लोजिंग प्राइस पर ऑर्डर लगाए जा सकते हैं।
- प्री-ओपन सेशनPre-open session
- सुबह 9:00 से 9:15 बजे तक होने वाली नीलामी, जिससे लगातार ट्रेडिंग शुरू होने से पहले दिन का ओपनिंग प्राइस तय होता है।
- प्राइस बैंडPrice band
- ट्रेडिंग में, वह दायरा जिसके भीतर किसी शेयर की कीमत एक दिन में घट-बढ़ सकती है। IPO में, वह दायरा जिसके भीतर निवेशक बोली लगा सकते हैं।
- प्राइमरी मार्केटPrimary market
- वह बाजार जहाँ कंपनी नए शेयर जारी करती है और उनकी बिक्री का पैसा उसे मिलता है, जैसे IPO या राइट्स इश्यू में।
- प्रमोटरPromoter
- किसी कंपनी का संस्थापक या नियंत्रण रखने वाला शेयरधारक समूह, जिस पर खुलासे और लॉक-इन के अलग नियम लागू होते हैं।
Q
- QIB(योग्य संस्थागत खरीदार)
- IPO में संस्थागत निवेशकों की कैटेगरी, जिसमें म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ, बैंक और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक शामिल हैं।
R
- RE(राइट्स एनटाइटलमेंट)
- राइट्स इश्यू में आपके डीमैट अकाउंट में क्रेडिट होने वाला इंस्ट्रूमेंट, जिसे ट्रेड किया जा सकता है। अगर आप न इसका इस्तेमाल करते हैं और न इसे बेचते हैं, तो यह बेकार होकर लैप्स हो जाता है।
- रिकॉर्ड डेटRecord date
- वह तारीख जिस दिन कंपनी शेयरधारकों का रजिस्टर चेक करके तय करती है कि कॉर्पोरेट एक्शन का फायदा किसे मिलेगा।
- रेगुलर प्लानRegular plan
- डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए खरीदा गया म्यूचुअल फंड प्लान, जिसमें डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन ज्यादा एक्सपेंस रेशियो से चुकाया जाता है।
- रिवर्स स्प्लिटReverse split
- कई शेयरों को मिलाकर एक शेयर बनाना, जिसमें फेस वैल्यू उसी अनुपात में बढ़ जाती है। कुल वैल्यू नहीं बदलती।
- RHP(रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस)
- IPO का लगभग अंतिम ऑफर डॉक्यूमेंट, जो सेबी के ऑब्जर्वेशन के बाद इश्यू की तारीखों के साथ दाखिल होता है। प्राइस बैंड और लॉट साइज इसी में होते हैं, या अक्सर इश्यू खुलने से कम से कम दो कामकाजी दिन पहले छपने वाले विज्ञापन में।
- राइट्स इश्यूRights issue
- कंपनी का मौजूदा शेयरधारकों को उनकी होल्डिंग के अनुपात में डिस्काउंट पर नए शेयर ऑफर करके नई पूँजी जुटाना।
- RII(रिटेल व्यक्तिगत निवेशक)
- ₹2 लाख तक के व्यक्तिगत आवेदनों के लिए IPO की कैटेगरी।
- रिस्कोमीटरRiskometer
- छह स्तरों वाला जोखिम संकेतक, जिसे हर म्यूचुअल फंड स्कीम को दिखाना जरूरी है। यह कम (Low) से बहुत ऊँचा (Very High) तक होता है और हर महीने इसका रिव्यू होता है।
- रोलिंग रिटर्नRolling returns
- तय अवधि वाली हर संभव विंडो में निकाले गए रिटर्न। इससे किसी अनुकूल शुरुआती तारीख का असर हट जाता है।
- RTA(रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट)
- वह एजेंट जो किसी कंपनी के शेयरधारकों का रजिस्टर रखता है और अलॉटमेंट, डिविडेंड और दूसरे कॉर्पोरेट एक्शन का काम संभालता है।
- रुपी कॉस्ट एवरेजिंगRupee cost averaging
- वह असर जिसमें निवेश की एक तय रकम से कीमतें कम होने पर ज्यादा यूनिट और ज्यादा होने पर कम यूनिट मिलती हैं। इससे औसत लागत घट जाती है।
S
- SCORES
- सेबी का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, जिस पर निवेशक बाजार मध्यस्थों और लिस्टेड कंपनियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं और उसकी स्थिति ट्रैक कर सकते हैं।
- सेबी (SEBI)(भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड)
- भारत के सिक्योरिटीज बाजार का नियामक, जो नियम बनाने, निगरानी करने और उन्हें लागू कराने के लिए जिम्मेदार है।
- सेकेंडरी मार्केटSecondary market
- एक्सचेंज, जहाँ निवेशक पहले से मौजूद शेयरों की आपस में खरीद-बिक्री करते हैं। इन सौदों से कंपनी को कुछ नहीं मिलता।
- सेंसेक्सSensex
- BSE का बेंचमार्क इंडेक्स, जिसमें 30 बड़ी भारतीय कंपनियाँ हैं। इसमें हर कंपनी का वेटेज फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से तय होता है।
- सेटलमेंटSettlement
- सौदे के बाद पैसे के बदले शेयरों के लेनदेन की प्रक्रिया। भारत में इक्विटी सामान्य तौर पर T+1 सेटलमेंट साइकिल पर सेटल होती है।
- SID(स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट)
- किसी म्यूचुअल फंड स्कीम का पूरा कानूनी डॉक्यूमेंट। इसमें एसेट एलोकेशन की वे सीमाएँ होती हैं, जिनका पालन जरूरी है, और एग्जिट लोड का ढाँचा भी।
- SIP(सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान)
- चुनी हुई स्कीम में तय अंतराल पर तय रकम निवेश करने का निर्देश। यह भुगतान का एक तरीका है, कोई प्रोडक्ट नहीं।
- SL(स्टॉप-लॉस लिमिट)
- ऐसा ऑर्डर जो कीमत के ट्रिगर प्राइस को छूते ही लिमिट ऑर्डर बन जाता है। इससे निकलने की कीमत आपके नियंत्रण में रहती है, लेकिन ऑर्डर एग्जीक्यूट न होने का जोखिम रहता है।
- SL-M(स्टॉप-लॉस मार्केट)
- ऐसा ऑर्डर जो कीमत के ट्रिगर प्राइस को छूते ही मार्केट ऑर्डर बन जाता है। एग्जीक्यूशन लगभग पक्का होता है, लेकिन कीमत पर आपका नियंत्रण नहीं रहता।
- स्लिपेजSlippage
- जिस कीमत की आपने उम्मीद की थी और जो कीमत आपको असल में मिली, उनके बीच का अंतर। यह ज्यादातर कम ट्रेडिंग वाले शेयरों में मार्केट ऑर्डर पर होता है।
- SME IPO
- NSE Emerge या BSE SME प्लेटफॉर्म पर आने वाला पब्लिक इश्यू, जिसमें पात्रता की शर्तें आसान होती हैं, न्यूनतम आवेदन का आकार बड़ा होता है और जोखिम ज्यादा होता है।
- स्पॉन्सरSponsor
- वह संस्था जो म्यूचुअल फंड की स्थापना करती है और ट्रस्टी व AMC को नियुक्त करती है।
- स्टॉक स्प्लिटStock split
- हर शेयर को कई शेयरों में बाँटना, जिसमें फेस वैल्यू उसी अनुपात में घट जाती है। कुल वैल्यू नहीं बदलती।
- STP(सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान)
- एक स्कीम से दूसरी स्कीम में नियमित अंतराल पर तय रकम ट्रांसफर करने का निर्देश। हर ट्रांसफर एक रिडेम्पशन है, जिस पर टैक्स लगता है।
- STT(सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स)
- सिक्योरिटीज के लेनदेन पर लगने वाला टैक्स, जो अपने-आप कट जाता है और आपके कॉन्ट्रैक्ट नोट में दिखता है।
- स्वैप रेशियोSwap ratio
- वह तय अनुपात, जिस पर विलय होने वाली कंपनी के शेयरों के बदले बची रहने वाली कंपनी के शेयर दिए जाते हैं।
- SWP(सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान)
- नियमित अंतराल पर तय रकम रिडीम करने का निर्देश। यह रकम आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट होती है।
T
- T+1
- भारत की सामान्य सेटलमेंट साइकिल, जिसमें सौदे के अगले कारोबारी दिन पैसे और शेयरों का लेनदेन पूरा होता है।
- टेंडर ऑफरTender offer
- बायबैक का वह तरीका, जिसमें कंपनी रिकॉर्ड डेट पर मौजूद शेयरधारकों से तय कीमत पर तय संख्या में शेयर खरीदने की पेशकश करती है।
- TER(टोटल एक्सपेंस रेशियो)
- वह सालाना प्रतिशत जो कोई फंड चार्ज करता है। यह रोज के हिसाब से लगता है और आपको दिखने वाली NAV में पहले से शामिल होता है।
- टिक साइजTick size
- किसी ऑर्डर की कीमत में मंजूर सबसे छोटा अंतर। दो टिक के बीच की कीमत पर लगाया गया ऑर्डर रिजेक्ट हो जाता है।
- ट्रैकिंग एररTracking error
- कोई पैसिव फंड अपने इंडेक्स के कितने करीब चलता है, इसका पैमाना। यह जितना कम हो, उतना बेहतर।
- ट्रेडिंग अकाउंटTrading account
- वह अकाउंट जिसके जरिए आप ऑर्डर लगाते हैं। इसमें लंबे समय के लिए कुछ नहीं रहता; शेयर आपके डीमैट अकाउंट में जाते हैं।
- ट्रेलिंग स्टॉप-लॉसTrailing stop-loss
- ऐसा स्टॉप-लॉस जो कीमत बढ़ने के साथ आपके फायदे की दिशा में खिसकता है, लेकिन कभी आपके खिलाफ नहीं खिसकता।
- TRI(टोटल रिटर्न इंडेक्स)
- इंडेक्स का वह रूप, जिसमें इंडेक्स में शामिल शेयरों से मिलने वाला डिविडेंड भी जुड़ा होता है। फंड के प्रदर्शन को परखने के लिए इसी को सही बेंचमार्क माना जाता है।
- ट्रिगर प्राइसTrigger price
- वह कीमत जिस पर निष्क्रिय पड़ा स्टॉप-लॉस ऑर्डर सक्रिय होता है और एक्सचेंज को भेजा जाता है।
- ट्रस्टीTrustee
- वह संस्था जो यूनिट होल्डरों के लिए म्यूचुअल फंड की संपत्ति ट्रस्ट में रखती है और AMC की निगरानी करती है।
U
- UPI मैंडेटUPI mandate
- IPO के लिए आवेदन करते समय आपके UPI ऐप में आने वाली ‘block funds’ रिक्वेस्ट, जिसे आप मंजूरी देते हैं। मैंडेट को मंजूरी न देने पर आवेदन अमान्य हो जाता है।
V
- VWAP(वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस)
- सौदों की मात्रा के हिसाब से निकाली गई औसत कीमत। इसका इस्तेमाल क्लोजिंग प्राइस की गणना में और एग्जीक्यूशन के बेंचमार्क में रेफरेंस के तौर पर होता है।
X
- XIRR
- SIP के रिटर्न का सही पैमाना, क्योंकि यह कई अलग-अलग तारीखों पर लगाए गए पैसे का हिसाब रखता है।
Y
- YTM(यील्ड टू मैच्योरिटी)
- किसी डेट पोर्टफोलियो की यील्ड का अंदाजा। असामान्य रूप से ऊँची YTM ज्यादा जोखिम वाली होल्डिंग का संकेत है, बेहतर फंड का नहीं।