मॉड्यूल 4 (कुल 5) · जब कंपनी आपके शेयरों में बदलाव करती है

कॉर्पोरेट एक्शन

एक्स-डेट और रिकॉर्ड डेट, डिविडेंड, बोनस और स्प्लिट, राइट्स इश्यू, बायबैक, विलय और डीमर्जर।

पाठ
6 पाठ
पढ़ने का कुल समय
कुल लगभग 24 मिनट
एक्सेस
पाठ 1 मुफ्त है · बाकी पाठ फुल एक्सेस में शामिल हैं (एक बार के ₹139 में)
आपकी प्रगति

इस मॉड्यूल के पाठ

  1. कॉर्पोरेट एक्शन, एक्स-डेट और रिकॉर्ड डेटशुरुआतीबाजार की तारीखों की सबसे उलझाने वाली जोड़ी, एक्स-डेट और रिकॉर्ड डेट, टाइमलाइन से समझें — और जानें कि एक्स-डेट पर शेयर की कीमत क्यों गिरती है, फिर भी किसी का कोई नुकसान नहीं होता। 4 मिनट
  2. डिविडेंड: यह कैसे काम करता है और इस पर टैक्स कैसे लगता हैशुरुआतीडिविडेंड यानी मुनाफे में से शेयरधारकों को दी जाने वाली नकदी — घोषणा में लिखा प्रतिशत वह क्यों नहीं, जो आप समझते हैं, और इस पर टैक्स कैसे लगता है। 4 मिनट
  3. बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिटशुरुआतीबोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट, दो ऐसे कदम, जिनसे आपके शेयरों की संख्या बढ़ती है, पर आपके असल मालिकाना हक में कुछ नहीं बदलता। जानें इनमें फर्क क्या है, और कंपनियाँ ऐसा करती ही क्यों हैं। 4 मिनट
  4. राइट्स इश्यू और राइट्स एनटाइटलमेंटमध्यमराइट्स इश्यू में कंपनी आपको डिस्काउंट पर और शेयर ऑफर करती है। आप या तो इसे लें, या यह हक बेच दें, या कुछ न करें — और कुछ न करना ही इकलौता विकल्प है, जिसमें आपको पैसे का नुकसान होता है। 4 मिनट
  5. शेयर बायबैक: टेंडर ऑफर और ओपन मार्केटमध्यमशेयर बायबैक यानी कंपनी का अपने ही शेयर वापस खरीदना — इसके दो तरीके, यह राइट्स इश्यू का उल्टा क्यों है, और एक्सेप्टेंस रेशियो का आपके लिए क्या मतलब है। 4 मिनट
  6. विलय, डीमर्जर, नाम में बदलाव और डीलिस्टिंगमध्यमकंपनियों के विलय या डीमर्जर, नाम बदलने या एक्सचेंज से पूरी तरह हट जाने पर आपके शेयरों का क्या होता है। 4 मिनट